Mar 24, 2016

Meri Geeli Holi Mujhe Lauta Do



इस बरस मुझे ऐसे रंग दे,
भीग जाये मेरी सांस भी,
न सोचूं मैं किसी के बारे में,
दो बूँद पानी पे है मेरा हक़ भी,
चिल्लाते हो मेरी होली पर,
मैंने पानी को बर्बाद किया,
पूरे साल जो गाड़ी धोते हो,
उस से कौन आबाद हुआ?
शावर में रोज़ नहाते हो,
समय पूरा लगते हो,
वाटर पार्क में अपने परिवार के संग,
खूब मज़ा उड़ाते हो,
पर जब मेरी बारी आती है,
मैं पिचकारी गर उठा लूँ,
खूब हो हल्ला मचाते हो,
यह देखो पानी बर्बाद करता है,
किसानो का दुःख दर्द न समझता है,
ऐसा इलज़ाम लगते हो,
फिर टीवी पर कैमरे के सामने,
छाती पीट मगरमच्छ के आंसू बहते हो,
हर होली पे सोचता हूँ,
मैंने ऐसा क्या गुनाह कर दिया?
दो बाल्टी पानी जो इस्तेमाल किया,
किसी को रंग से भर दिया,
तो कौन सा बुरा किया?
पानी के चार गुब्बारों से,
कोई आसमान न फट जायेगा,
न मैं वाटर पार्क में जाऊं ,
न मुझे रेन डांस से कुछ लेना देना,
मुझे तो बस मेरा त्यौहार लौटा दो,
वरना अगले बकरीद पे बकरा भी न कटने देना,
गर मैं तुमसे जवाब मांगू,
खून साफ़ करने को कितना पानी बहते हो?
या अपने घर की घास पर,
कितने लीटर लुटाते हो?
बहुत हुआ हर साल का ड्रामा,
बहुत बोल लिया मुझे बुरा,
बस कर, चुप कर,
होली खेल, खूब भीग,
पानी बचने को बहुत मौके मिलेंगे,
कार नहीं धोना एक हफ्ता,
शावर की बजाये बाल्टी का इस्तेमाल कर लेना,
दो हफ्ते मांस न खाना,
चार दिन घास न भीगना,
बस हिसाब बराबर हो जायेगा,
पर अपनी जुबां को बंद कर,
मेरे त्योहार को वापस कर,
मुझे मेरी पुरानी होली चाहिए,
प्यार वाली, पिचकारी वाली,
ख़ुशी वाली, सुकून वाली,
वह प्यारी होली गीली वाली..

 


Please follow and like us:


« « Bank Holidays March-April 2015 | The curious case of being an Indian » »

2 Comments

  • Excellent!!!

  • बहुत ही उम्दा

Leave a comment

TWITTER
FACEBOOK
GOOGLE
http://www.anuragbhateja.com/about-me/my-life-my-thoughts/meri-geeli-holi-mujhe-lauta-do">
EMAIL
RSS