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Matka aur uska paani

कुछ अलग ही बात होती है,
इस मटके वाले पानी में,
ना जाने क्यों ऐसा लगता है,
की रूह तक शांत हो जाती है,
समय ने कुछ बदल दिया है हमें,
मटके से बेहतर बर्फ नज़र आती है,
क्यों है ऐसा, समझ नहीं पाता हूँ,
क्यों धरती से प्रेम होने पर भी,
मटके को न कह जाता हूँ,
वह सोंधी सी खुशबू मिटटी की,
जो मटके से आती है,
मेरी रूह को जो खुशबू,
कुछ ख़ास कह जाती है,
काश यह बर्फ ने जीवन में,
अपनी पैठ न बनाई होती,
तो आज भी सोंधी सी वह खुशबू,
मेरे ज़हन पे छाई होती,
चलो वादा करें खुद से,
कम से कम एक मटका तो होगा घर पे,
इन गर्मियों में शायद,
इसी से उस कुम्हार के घर में रौशनी हो जाये….

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Mar 30, 2010

एक शब्द

काश तुम्हारे बोले उस वाक्य में वह शब्द न होता..
काश आज मुझे उम्मीदों का वह पंख मिल गया होता…
तुम्हारी झील सी आँखों में आज मैं बस खो गया होता…
काश तुम्हारे बोले उस वाक्य में बस एक शब्द न होता…

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विश्वास

विश्वास है मुझे तुमपर अपने से ज्यादा…
खुश रखूँगा तुम्हें अपने से ज्यादा…
ख़ामोशी से सुनूंगा तुम्हारी हर बात…
कम न होंगे मेरे दिल से कभी भी यह जज़्बात…
प्यार है तुमसे तो खुल कर कहता भी हूँ…… See More
तुम्हारे सामने बोलने से डरता भी हूँ…
विश्वास है मुझे की समझोगी यह बात तुम…
प्यार मिलेगा तुमसे हद से ज्यादा… :)

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Aaj Main

पलकों के साए में तुझे छुपा कर रख लूँ आज मैं
तेरे साथ बीते हर पल को कुछ खास बना लूँ आज मैं
उम्मीद है की तेरे साथ रहेगा ज़िन्दगी भर ऐ दोस्त
हर गम को ख़ुशी से तेरे साथ बांटू आज मैं
तेरी बातों को दिल की किताब में लिखने का इंतज़ार है आज मुझे
सब कुछ भुला कर बस तुझे सुनना चाहता हूँ आज मैं
न जाने कब वोह पल आयेंगे जब तू मुझे भी प्यार भरी नज़रों से देखेगी
तुझसे मिलने की तमन्ना में एक और दिन जी लूँगा मैं

waiting and will always wait for you to come back in my life…
always and yours only :)

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Mar 26, 2010

Kuch Pal

आज मैं सोना चाहता हूँ…

तेरी गोद में सर रख कर…

तेरे आँचल के साये में कुछ पल जीना चाहता हूँ…

बहुत जी लिया तेरी यादों के साए में…

उन साथ बिताये पलों को भूल आज मैं फिर से तेरे साथ जीना चाहता हूँ…

तेरे आगोश में छुप कर, कुछ पल आंखें बंद कर…

तुझे महसूस करना चाहता हूँ…

आज मैं कुछ पल सोना चाहता हूँ…

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Ae Dost

Ae Dost

Teri ankhon mein kho jane ko dil karta hai
Teri hasi mein beh jane ko dil karta hai

Har pal main teri baton ko yaad karta hun
Tere sath rahe palon ko jeene ki koshish karta hun

Dosti ka ehsas kya hota hai tune mujhe fir se batla diya
Ankhon hi ankhon mein sath hone ka ehsaas dila diya

mujhe yaad hai woh pal jab tu mujhe pehli baar mili thi
Teri muskaan mein 100 batein chupi mili thi

Na jaane kyun us pal mein tera kayal main ho gaya tha
Tere har paigam ko dil se lagane ko tatpar ho gaya tha

Dost ban kar zindagi k har ko mehkana bhi teri ik ada hai
Tu hamesha mere kareeb rahe bas rabb se meri yehi dua hai…

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NAUMEED

is tarah woh chali jayegi
yeh umeed na thi
aisa wada le jayegi
yeh umeed na thi

jate jate is dil ko rula gayee
apni zindagi mujhe jine ko keh gayee

han main uske liye jiyunga
uska har khwab main poora karunga
umeed karta hun ki maut ke
uske sath phir se is zammen ko aabad karunga

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